सूरदास के 'भ्रमरगीत' में वचन की भावप्रेरित वक्ता द्वारा प्रेम-प्रसूत अंतर्वृत्तियों का उद्घाटन – 'भ्रमरगीतसार' के आधार पर मीमांसा कीजिए। (UPSC 1989, 55 Marks, )

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