अबे, सुन बे गुलाब, भूल मत जो पाई खुशबू, रंगोआब, खून चूसा खाद का तून अशिष्ट, डाल पर इतराता है केपीटलिस्ट! कितनों को तूने बनाया है गुलाम, माली कर रक्खा, सहाय जाड़ा-घाम। (UPSC 2004, 20 Marks, )

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