अंग-अंग नग जगमगत दीपसिखा-सी देह। दिया बढ़ाएँ हूँ रै बड़ी उज्यारी गेह।। पत्रा ही तिथि पाइयै वा घर कै चहुँ पास। नितप्रति पून्यौई रहै, आनन ओप उजास। (UPSC 2002, 20 Marks, )

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