महानृत्य का विषम सम, अरी अखिल स्पंदनों की तू माप, तेरी ही विभूति बनती है सृष्टि सदा होकर अभिशाप। (UPSC 2024, 10 Marks, )

महानृत्य का विषम सम, अरी अखिल स्पंदनों की तू माप, तेरी ही विभूति बनती है सृष्टि सदा होकर अभिशाप।