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‘ब्रह्मराक्षस’ अस्तित्ववादी मान्यताओं और खंडित व्यक्तित्व का प्रतीक है। इस कथन के आलोक में ‘ब्रह्मराक्षस’ कविता की मूल संवेदना पर प्रकाश डालिए। (UPSC 2022, 15 Marks, )
‘ब्रह्मराक्षस’ अस्तित्ववादी मान्यताओं और खंडित व्यक्तित्व का प्रतीक है। इस कथन के आलोक में ‘ब्रह्मराक्षस’ कविता की मूल संवेदना पर प्रकाश डालिए।View Answer
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“मुक्तिबोध रचित ‘ब्रह्मराक्षस’ की उपलब्धि है भयानक अंगीरस, तिलिस्मी ‘वस्तु’ और आवेग — कल्पना-संवेदना का संगम।” इस कथन की समीक्षा कीजिए। (UPSC 2018, 15 Marks, )
“मुक्तिबोध रचित ‘ब्रह्मराक्षस’ की उपलब्धि है भयानक अंगीरस, तिलिस्मी ‘वस्तु’ और आवेग — कल्पना-संवेदना का संगम।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।View Answer
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“मुक्तिबोध ने ‘ब्रह्मराक्षस’ कविता में फैंटेसी शैली के माध्यम से कविता जैसी विधा में नाटकीय प्रभाव की सृष्टि की है।” — इस कथन की तर्क एवं उदाहरण सहित विवेचना कीजिए। (UPSC 2017, 15 Marks, )
“मुक्तिबोध ने ‘ब्रह्मराक्षस’ कविता में फैंटेसी शैली के माध्यम से कविता जैसी विधा में नाटकीय प्रभाव की सृष्टि की है।” — इस कथन की तर्क एवं उदाहरण सहित विवेचना कीजिए।View Answer
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“‘अंधेरे में’ कविता का मूल काव्य है – अस्मिता की खोज; जो आधुनिक मानव की सर्वाधिक ज्वलंत समस्या है।” — इस उक्ति की तर्कयुक्त व्याख्या कीजिए। (UPSC 1989, 55 Marks, )
“‘अंधेरे में’ कविता का मूल काव्य है – अस्मिता की खोज; जो आधुनिक मानव की सर्वाधिक ज्वलंत समस्या है।” — इस उक्ति की तर्कयुक्त व्याख्या कीजिए।Enroll Now
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वस्तु वर्णन की दृष्टि से ‘राम की शक्तिपूजा’ और ‘अंधेरे में’ शीर्षक कविताओं पर विचार कीजिए। आप दोनों में किसे श्रेष्ठ कविता मानते हैं? (UPSC 1986, 55 Marks, )
वस्तु वर्णन की दृष्टि से ‘राम की शक्तिपूजा’ और ‘अंधेरे में’ शीर्षक कविताओं पर विचार कीजिए। आप दोनों में किसे श्रेष्ठ कविता मानते हैं?Enroll Now
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“‘अंधेरे में’ शीर्षक कविता के प्रतीक प्राचीन गाथाओं के टुकड़े जान पड़ते हैं, मगर इन टुकड़ों के सन्दर्भ आधुनिक हैं।” — इस उक्ति के औचित्य पर विचार कीजिए। (UPSC 1986, 55 Marks, )
“‘अंधेरे में’ शीर्षक कविता के प्रतीक प्राचीन गाथाओं के टुकड़े जान पड़ते हैं, मगर इन टुकड़ों के सन्दर्भ आधुनिक हैं।” — इस उक्ति के औचित्य पर विचार कीजिए।Enroll Now
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