“अभिजात वर्ग और नागरिक जीवन का चित्रण प्रेमचन्द ने बहुत कम किया है; और जहाँ ऐसे स्थल पाए हैं वहाँ उनका मन रमा नहीं है।” — ‘गोदान’ झी इस आधार पर समीक्षा कीजिए। (UPSC 1985, 55 Marks, )

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