“‘गोदान' न केवल कृषक-जीवन का महाकाव्य है, अपितु समूचे युग की व्यथा-कथा है।” — इस कथन का पक्षापक्ष-विमर्श प्रस्तुत कीजिए। (UPSC 2011, 30 Marks, )

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