महत्ता के चरण में था विषादाकुल मन ! मेरा उसी से उन दिनों होता मिलन यदि तो व्यथा उसकी स्वयं जीकर बताता मैं उसे उसका स्वयं का मूल्य, उसकी महत्ता ! (UPSC 2019, 10 Marks, )

महत्ता के चरण में था विषादाकुल मन ! मेरा उसी से उन दिनों होता मिलन यदि तो व्यथा उसकी स्वयं जीकर बताता मैं उसे उसका स्वयं का मूल्य, उसकी महत्ता !