सुना आपने जो वह मेरा नहीं, न वीणा का था: वह तो सब कुछ की तथता थी महाशून्य, वह महामौन अविभाज्य, अनाप्त, अद्रवित, अप्रमेय जो शब्दहीन सब में गाता है। (UPSC 2025, 10 Marks, )

सुना आपने जो वह मेरा नहीं, न वीणा का था: वह तो सब कुछ की तथता थी महाशून्य, वह महामौन अविभाज्य, अनाप्त, अद्रवित, अप्रमेय जो शब्दहीन सब में गाता है।