“विषमता की पीड़ा से व्यस्त हो रहा स्पंदित विश्व महान, यही दुःख-सुख, विकास का सत्य यही भूमा का मधुमय दान। नित्य समरसता का अधिकार उमड़ता कारण-जलधि समान, व्यथा से नीली लहरों बीच बिखरते सुख-मणिगण द्युतिमान॥”
(UPSC 2014, 10 Marks, )
“विषमता की पीड़ा से व्यस्त हो रहा स्पंदित विश्व महान, यही दुःख-सुख, विकास का सत्य यही भूमा का मधुमय दान। नित्य समरसता का अधिकार उमड़ता कारण-जलधि समान, व्यथा से नीली लहरों बीच बिखरते सुख-मणिगण द्युतिमान॥”
“विषमता की पीड़ा से व्यस्त हो रहा स्पंदित विश्व महान, यही दुःख-सुख, विकास का सत्य यही भूमा का मधुमय दान। नित्य समरसता का अधिकार उमड़ता कारण-जलधि समान, व्यथा से नीली लहरों बीच बिखरते सुख-मणिगण द्युतिमान॥”
(UPSC 2014, 10 Marks, )