विश्व की दुर्बलता बल बने पराजय का बढ़ता व्यापार हंसाता रहे उसे सविलास शक्ति का क्रीड़ामय संचार। शक्ति के विद्युतकण जो व्यस्त विकल बिखरे हैं हो निरुपाय समन्वय उसको करे समस्त विजयिनी मानवता हो जाय। (UPSC 2015, 10 Marks, )

विश्व की दुर्बलता बल बने पराजय का बढ़ता व्यापार हंसाता रहे उसे सविलास शक्ति का क्रीड़ामय संचार। शक्ति के विद्युतकण जो व्यस्त विकल बिखरे हैं हो निरुपाय समन्वय उसको करे समस्त विजयिनी मानवता हो जाय।