दुःख की पिछली रजनी बीच, विकसता सुख का नवल प्रभात। एक परदा यह झीना नील, छिपाये है जिसमें सुख गात। जिसे तुम समझे हो अभिशाप, जगत की ज्वालाओं का मूल— ईश का वह रहस्य वरदान, कभी मत इसको जाओ भूल॥ (UPSC 2021, 10 Marks, )

दुःख की पिछली रजनी बीच, विकसता सुख का नवल प्रभात। एक परदा यह झीना नील, छिपाये है जिसमें सुख गात। जिसे तुम समझे हो अभिशाप, जगत की ज्वालाओं का मूल— ईश का वह रहस्य वरदान, कभी मत इसको जाओ भूल॥