कौन हो तुम वसंत के दूत विरस पतझड़ में अति सुकुमार। घन-तिमिर में चपला की रेख, तपन में शीतल मंद बयार। नखत की आशा-किरण समान, हृदय के कोमल कवि की कांत - कल्पना की लघु लहरी दिव्य, कह रही मानस-हलचल शांत।।
(UPSC 2022, 10 Marks, )
कौन हो तुम वसंत के दूत विरस पतझड़ में अति सुकुमार। घन-तिमिर में चपला की रेख, तपन में शीतल मंद बयार। नखत की आशा-किरण समान, हृदय के कोमल कवि की कांत - कल्पना की लघु लहरी दिव्य, कह रही मानस-हलचल शांत।।
कौन हो तुम वसंत के दूत विरस पतझड़ में अति सुकुमार। घन-तिमिर में चपला की रेख, तपन में शीतल मंद बयार। नखत की आशा-किरण समान, हृदय के कोमल कवि की कांत - कल्पना की लघु लहरी दिव्य, कह रही मानस-हलचल शांत।।
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