निर्गुन कौन देस को वासी? मधुकर! हंसि समुझाय, सौंह दै बूझति साँच, न हांसी। को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि, को दासी? कैसो वरन, भेस है कैसो, केहि रस के अभिलासी। पावैगो पुनि कियो आपनो जो रे कहैगो गांसी। सुनत मौन है रही ठग्यौ सो सूर सबे मति नासी॥
(UPSC 2015, 10 Marks, )
निर्गुन कौन देस को वासी? मधुकर! हंसि समुझाय, सौंह दै बूझति साँच, न हांसी। को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि, को दासी? कैसो वरन, भेस है कैसो, केहि रस के अभिलासी। पावैगो पुनि कियो आपनो जो रे कहैगो गांसी। सुनत मौन है रही ठग्यौ सो सूर सबे मति नासी॥
निर्गुन कौन देस को वासी? मधुकर! हंसि समुझाय, सौंह दै बूझति साँच, न हांसी। को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि, को दासी? कैसो वरन, भेस है कैसो, केहि रस के अभिलासी। पावैगो पुनि कियो आपनो जो रे कहैगो गांसी। सुनत मौन है रही ठग्यौ सो सूर सबे मति नासी॥
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