भगवान् सोम की मैं कन्या हूँ। प्रथम वेदों ने मधु नाम से मुझे आदर दिया। फिर देवताओं की प्रिया होने से मैं सुरा कहलाई और मेरे प्रचार के हेतु श्रौत्रामणि यज्ञ की सृष्टि हुई। स्मृति और पुराणों में भी प्रवृत्ति मेरी नित्य कही गई। तंत्र केवल मेरी ही हेतु बने। संसार में चार मत बहुत प्रबल हैं। इन चारों में मेरी चार पवित्र प्रेम मूर्ति विराजमान हैं। (UPSC 2018, 10 Marks, )

भगवान् सोम की मैं कन्या हूँ। प्रथम वेदों ने मधु नाम से मुझे आदर दिया। फिर देवताओं की प्रिया होने से मैं सुरा कहलाई और मेरे प्रचार के हेतु श्रौत्रामणि यज्ञ की सृष्टि हुई। स्मृति और पुराणों में भी प्रवृत्ति मेरी नित्य कही गई। तंत्र केवल मेरी ही हेतु बने। संसार में चार मत बहुत प्रबल हैं। इन चारों में मेरी चार पवित्र प्रेम मूर्ति विराजमान हैं।
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महाराज वेदान्त ने बडा ही ऊपकार किया। सब हिन्दू ब्रह्मा हो गए। महाराज, वेदांत ने बड़ा ही उपकार किया। सब हिंदू ⁠⁠ब्रह्म हो गए। किसी को इतिकर्त्तव्यता बाकी हो न ⁠⁠रही। ज्ञानी बनकर ईश्वर से विमुख हुए, रुक्ष हुए, ⁠⁠अभिमानी हुए और इसी से स्नेहशून्य हो गए। जब ⁠⁠स्नेह ही नहीं तब देशोद्धार का प्रयत्न कहाँ? बस, जय ⁠⁠शंकर की।। (UPSC 2001, 20 Marks, )

महाराज वेदान्त ने बडा ही ऊपकार किया। सब हिन्दू ब्रह्मा हो गए। महाराज, वेदांत ने बड़ा ही उपकार किया। सब हिंदू ⁠⁠ब्रह्म हो गए। किसी को इतिकर्त्तव्यता बाकी हो न ⁠⁠रही। ज्ञानी बनकर ईश्वर से विमुख हुए, रुक्ष हुए, ⁠⁠अभिमानी हुए और इसी से स्नेहशून्य हो गए। जब ⁠⁠स्नेह ही नहीं तब देशोद्धार का प्रयत्न कहाँ? बस, जय ⁠⁠शंकर की।।
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