विजन-वन-वल्लरी पर सोती थी सुहाग-भरी स्नेह-स्वप्न-मगन अमल-कोमल-तनु तरुणी-जुही की कली, दृग बन्द किये, शिथिल, -पत्रांक में, वासन्ती निशा थी; विरह-विधुर-प्रिया-संग छोड़ किसी दूर देश में था पवन जिसे कहते हैं मलयानिल। (‘राग-विराग', निराला, ‘जुही की कली’ से, पृष्ठ 48)।
(UPSC 2000, 20 Marks, )