मैं अनुभव करता हूँ कि यह ग्राम-प्रांतर मेरी वास्तविक भूमि है। मैं कई सूत्रों से इस भूमि के साथ जुड़ा हूँ। उन सूत्रों में तुम हो, यह आकाश और ये मेघ हैं, यहाँ की हरियाली, हरिणों के बच्चे, पशुपाल हैं। ... यहाँ से जाकर मैं अपनी भूमि से उखड़ जाऊँगा। (UPSC 2016, 10 Marks, )

मैं अनुभव करता हूँ कि यह ग्राम-प्रांतर मेरी वास्तविक भूमि है। मैं कई सूत्रों से इस भूमि के साथ जुड़ा हूँ। उन सूत्रों में तुम हो, यह आकाश और ये मेघ हैं, यहाँ की हरियाली, हरिणों के बच्चे, पशुपाल हैं। ... यहाँ से जाकर मैं अपनी भूमि से उखड़ जाऊँगा।