समस्त आलोक, चैतन्य और प्राणशक्ति, प्रभु की दी हुई है। मृत्यु के द्वारा वही इसको लौटा लेता है। जिस वस्तु को मनुष्य दे नहीं सकता, उसे ले लेने की स्पर्धा से बढ़कर दूसरा दम्भ नहीं। मैं फल-पूल खाकर, अंजलि से जलपान कर, तृण-शय्या पर आँख बन्द किए सो रहता हूँ। न मुझसे किसी को डर है और न मुझसे किसी को डरने का कारण है। तुम यदि हठात मुझे ले जाना चाहो तो केवल मेरे शरीर को ले जा सकते हो, मेरी स्वतंत्र आत्मा पर तुम्हारे देवपुत्र का भी अधिकार नहीं हो सकता। (UPSC 1984, 20 Marks, )

Enroll Now