और यह राजधानी! जहाँ सब अपना है, अपने देश का है ... पर कुछ भी अपना नहीं है, अपने देश का नहीं है। तमाम सड़कें हैं जिन पर वह जा सकता है, लेकिन वे सड़कें कहीं नहीं पहुँचातीं। उन सड़कों के किनारे घर हैं; बस्तियाँ हैं पर किसी भी घर में वह नहीं जा सकता। उन घरों के बाहर फाटक हैं, जिन पर कुत्तों से सावधान रहने की चेतावनी है, फूल तोड़ने की मनाही है और घंटी बजाकर इन्तजार करने की मजबूरी है। (UPSC 2013, 10 Marks, )

और यह राजधानी! जहाँ सब अपना है, अपने देश का है ... पर कुछ भी अपना नहीं है, अपने देश का नहीं है। तमाम सड़कें हैं जिन पर वह जा सकता है, लेकिन वे सड़कें कहीं नहीं पहुँचातीं। उन सड़कों के किनारे घर हैं; बस्तियाँ हैं पर किसी भी घर में वह नहीं जा सकता। उन घरों के बाहर फाटक हैं, जिन पर कुत्तों से सावधान रहने की चेतावनी है, फूल तोड़ने की मनाही है और घंटी बजाकर इन्तजार करने की मजबूरी है।