“उपनिषदों के 'नेति-नेति' से ही गौतम का अनात्मवाद पूर्ण है। यह प्राचीन महर्षियों का कथित सिद्धान्त 'मध्यमा-प्रतिपदा' के नाम से संसार में प्रचारित हुआ। व्यक्ति-रूप में आत्मा के सदृश कुछ नहीं है।” (UPSC 2011, 20 Marks, )

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