जब स्वजन लोग अपने शील-शिष्टाचार का नालन करें—आत्मसमर्पण, सहानुभूति, सत्पथ का अवलंबन करें, तो दुर्दिन का साहस नहीं कि उस कुटुम्ब की ओर आँख उठाकर देखे। इसलिए इस कठोर समय में भगवान्‌ की स्निग्धकरुणा का शीतल ध्यान कर। (UPSC 2007, 20 Marks, )

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