“आर्य, रक्तपात शत्रु को पराजित करने का सफल उपाय नहीं। शस्त्र द्वारा शत्रु को वध किया जा सकता है, उसे कुछ काल के लिए वश में किया जा सकता है, परन्तु विजय नहीं किया जा सकता। मनुष्य मृत्यु की अपेक्षा पराभव को केवल कायरता और प्रतिहिंसा की भावना से ही स्वीकार करता है।”
(UPSC 2008, 20 Marks, )