जो कुछ अपने से नहीं बन पड़ा, उसी के दूख का नाम मोह है। पाले हुए कर्तव्य और निपटाये हुए कामों का क्या मोह! मोह तो उन नावों को छोड़ जाने में है, साथ हम अपना कर्तव्य न निभा सके; उन अधूरे मंसूबों में है, जिन्हें हम पूरा न कर सके। (UPSC 2014, 10 Marks, )

जो कुछ अपने से नहीं बन पड़ा, उसी के दूख का नाम मोह है। पाले हुए कर्तव्य और निपटाये हुए कामों का क्या मोह! मोह तो उन नावों को छोड़ जाने में है, साथ हम अपना कर्तव्य न निभा सके; उन अधूरे मंसूबों में है, जिन्हें हम पूरा न कर सके।