विचित्र प्रोसेशन, गंभीर क्विक मार्च... कलाबत्तूवाली काला ज़रीदार ड्रेस पहने चमकदार बैंड-दल— अस्थि-रूप, यकृत-स्वरूप, उदर-आकृति आँतों के जालों से, बाजे वे दमकते हैं भयंकर गंभीर गीत-स्वप्न-तरंगें उभारते रहते, ध्वनियों के आवर्त मँडराते पथ पर। (UPSC 1995, 20 Marks, )

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