वह बिठा देता है तुंग शिखर के खतरनाक, खुरदरे कगार-तट पर शोचनीय स्थिति में ही छोड़ देता मुझको। कहता है - "पार करो पर्वत-संधि के गहवर, रस्सी के पुल पर चलकर दूर उस शिखर-कगार पर स्वयं ही पहुँचो" अरे आई, मुझे नहीं चाहिए शिखरों की यात्रा, मुझे डर लगता है ऊँचाइयों से।
(UPSC 1992, 20 Marks, )