जाना बस, पिक-बालिका प्रथम पल अन्य नीड़ में जब सक्षम होती उड़ने को, अपना स्वर भर करती ध्वनित मौन प्रांतर। तू खिंची दृष्टि में मेरी छवि, जागा उर में तेरा प्रिय कवि, उन्मनन-गुंज सज हिला कुंज तरु-पल्लव कलि-दल पुंज-पुंज, बह चली एक अज्ञात बात चूमती केश—मृदु नवल गात, देखती सकल निष्पलक-नयन तू, समझा मैं तेरा जीवन।।
(UPSC 1991, 20 Marks, )
Enroll
Now
जाना बस, पिक-बालिका प्रथम पल अन्य नीड़ में जब सक्षम होती उड़ने को, अपना स्वर भर करती ध्वनित मौन प्रांतर। तू खिंची दृष्टि में मेरी छवि, जागा उर में तेरा प्रिय कवि, उन्मनन-गुंज सज हिला कुंज तरु-पल्लव कलि-दल पुंज-पुंज, बह चली एक अज्ञात बात चूमती केश—मृदु नवल गात, देखती सकल निष्पलक-नयन तू, समझा मैं तेरा जीवन।।
(UPSC 1991, 20 Marks, )