बैठे मारुति देखते रामचरणारविन्द, युग 'अस्ति नास्ति' के एक रूप, गुणगण अनिन्द्य, साधना मध्य भी साम्य वामा कर दक्षिणपद, दक्षिण करतल पर वाम चरण, कपिवर, गद् गद् पा सत्य सच्चिदानन्द रूप, विश्राम धाम, जपते सभक्ति अजपा विभक्त हो राम नाम। युग चरणों पर आ पड़े अस्तु वे अश्रु युगल, देखा कवि ने, चमके नभ में ज्यों तारादल।। (UPSC 1994, 20 Marks, )

Enroll Now