शत-शुद्धि-बोध - सूक्ष्मातिसूक्ष्म मन का विवेक, जिनमें है छात्र-धर्म का धृत पूर्णाभिषेक, जो हुए प्रजापतियों से, संयम से रक्षित, वे शर हो गए आज रण में श्रीहत, खण्डित ! देखा, हैं महाशक्ति रावण को लिए अंक, लांछन को ले जैसे शशांक नभ में अशंक; हत मन्त्रपूत शर सम्वृत करतीं बार-बार निष्फल होते लक्ष्य पर क्षिप्र वार पर वार ! (UPSC 1998, 20 Marks, )

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