कितनों को तूने बनाया है गुलाम, माली कर रखा, सहाया जाड़ा-घाम; हाथ जिसके तू लगा, पैर सर रखकर व” पीछे को भगा औरत की जानिब मैदान यह छोड़कर तबेले को टट्टू जैसे तोड़कर शाहों, राजों, अमीरों का रहा प्यारा तभी साधारणों से तू रहा न्यारा।
(UPSC 2008, 20 Marks, )