हम बाहा उन्नति पर कभी मरते न थे संसार में, बस मप्र थे अन्तर्जगत के अमृत-पारावार में। जड़ से हमें क्या, जबकि हम थे नित्य चेतन से मिले, हैं दीप उनके निकट क्या जो पद्म दिनकर से खिले।
(UPSC 2013, 10 Marks, )
हम बाहा उन्नति पर कभी मरते न थे संसार में, बस मप्र थे अन्तर्जगत के अमृत-पारावार में। जड़ से हमें क्या, जबकि हम थे नित्य चेतन से मिले, हैं दीप उनके निकट क्या जो पद्म दिनकर से खिले।
हम बाहा उन्नति पर कभी मरते न थे संसार में, बस मप्र थे अन्तर्जगत के अमृत-पारावार में। जड़ से हमें क्या, जबकि हम थे नित्य चेतन से मिले, हैं दीप उनके निकट क्या जो पद्म दिनकर से खिले।
(UPSC 2013, 10 Marks, )