जिसकी प्रभा के सामने रवि-तेज भी फीका पड़ा, अध्यात्म-विद्या का यहाँ आलोक फैला था बड़ा! मानस-कमल सबके यहाँ दिन-रात रहते थे खिले, मानो सभी जन ईश की ज्योतिश्छटा में थे मिले॥
(UPSC 2020, 10 Marks, )
जिसकी प्रभा के सामने रवि-तेज भी फीका पड़ा, अध्यात्म-विद्या का यहाँ आलोक फैला था बड़ा! मानस-कमल सबके यहाँ दिन-रात रहते थे खिले, मानो सभी जन ईश की ज्योतिश्छटा में थे मिले॥
जिसकी प्रभा के सामने रवि-तेज भी फीका पड़ा, अध्यात्म-विद्या का यहाँ आलोक फैला था बड़ा! मानस-कमल सबके यहाँ दिन-रात रहते थे खिले, मानो सभी जन ईश की ज्योतिश्छटा में थे मिले॥
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