चेतनि चौकी बैसि करि, सतगुरु दीन्ही धीर। निरभै होइ निसंक भजि, केवल कहै कबीर। यहु तन जालौ मसि करौं, लिखौं राम का नाउँ। लेखणि करूँ करंक की, लिखि लिख राम पठाऊँ॥ कया कमंडल भरि लिया, उज्जल निर्मल नीर। तन मन जोबन भरि पिया, प्यास न मिटी सरीर॥ (UPSC 1985, 20 Marks, )

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