ना गुर मिल्या न सिष भया, लालच खेल्या डाव। दुन्यू बूड़े धार मैं, चढ़ि पाथर की नाव।। चौंसठि दीवा जोइ करि, चौदह चंदा मांहि। तिहिं घरि किसकौ चानिणौ, जिहि घरि गोविंद नांहिं ॥ निस अँधियारी कारणैं, चौरासी लख चंद। अति आतुर ऊदै किया, तऊ दिष्टि नहिं मंद।। (UPSC 1998, 20 Marks, )

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