सतगुरु की महिमा अनंत अनंत किया उपगार। लोचन अनंत उघाडिया, अनंत दिखावण हार।। कबीर सुमिरण सार है, और सकल जंजाल। आदि अंति सब सोधिया दूजा देखौं काल॥ आषड़ियाँ झांई पड़ी, पंथ निहारि-निहारि। जीभड़ियाँ छाला पड्या, राम पुकारि-पुकारि।। (UPSC 1993, 20 Marks, )

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