सतगुर मार्‌या बाण भरि, धरि करि सूधी मूठि। अंगि उघाड़ै लागिया, गई दवा सूँ फूंटि। चोपडि मांडी चौहटे, अरध उरव बाजार। कहै कबीरा राम जन, खेलौ संत विचार ॥ रात्यूँ रूंनी विरहनीं, ज्यू बंचौ कूं कुज। कबीर अंतर प्रजल्या, प्रगट्या विरहा पुज ॥ नैनी नीझरि लाइया, रहट बहै निस जाम। पपीहा ज्यूं पिव पिव करों, कवरू मिलहुगे राम ॥ (UPSC 1994, 20 Marks, )

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