अगनि जो लागी नीर मैं, कंदू जलिया झारि। उतर दषिण के पंडिता, रहे विचारि विचारि।। दौ लागी साझर जल्या, पंषी बैठे आइ। दाधी देह. न पालवै, सतगुर गया लगाइ॥ संमदर लागी आगि, नदिया जल कोइला भई। द देखि कबीरा जागि, मंछी रूषां चढ़ि गई।। (UPSC 1999, 20 Marks, )

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