अंबर कुंजां कुरलियाँ, गरजि भरे सब ताल। जिनि षैं गोबिंद बीछुटे, तिनके कौण हवाल।। चकवी बिछुटी रैणि की, आइ मिली परभाति। जे जन बिछुटे राम सूं, ते दिन मिले न राति।। (UPSC 2006, 20 Marks, )

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