सेवा ही वह सीमेंट है, जो दम्पत्ति को जीवनपर्यन्त स्नेह और साहचर्य में जोड़ रख सकता है, जिस पर बड़े-बड़े आघातों का कोई असर नहीं होता। जहाँ सेवा का अभाव है, वहीं विवाह-विच्छेद है, परित्याग है, अविश्वास है। और आपके ऊपर, पुरुष जीवन की नौका का कर्णधार होने के कारण जिम्मेदारी ज्यादा है। आप चाहें तो नौका को आँधी और तूफानों में पार लगा सकती हैं। और आपने असावधानी की, तो नौका डूब जाएगी और उसके साथ आप भी डूब जाएंगी। (गोदान)
(UPSC 1979, 20 Marks, )
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सेवा ही वह सीमेंट है, जो दम्पत्ति को जीवनपर्यन्त स्नेह और साहचर्य में जोड़ रख सकता है, जिस पर बड़े-बड़े आघातों का कोई असर नहीं होता। जहाँ सेवा का अभाव है, वहीं विवाह-विच्छेद है, परित्याग है, अविश्वास है। और आपके ऊपर, पुरुष जीवन की नौका का कर्णधार होने के कारण जिम्मेदारी ज्यादा है। आप चाहें तो नौका को आँधी और तूफानों में पार लगा सकती हैं। और आपने असावधानी की, तो नौका डूब जाएगी और उसके साथ आप भी डूब जाएंगी। (गोदान)
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