नारी केवल माता है और इसके उपरान्त वह जो कुछ है वह सब मातृत्व का उपक्रम मात्र। मातृत्व संसार की सबसे बड़ी साधना, सबसे बड़ी तपस्या, सबसे बड़ा त्याग और सबसे महान विजय है। एक शब्द में, उसे लय कहूँगा—जीवन का, व्यक्तित्व का और नारीत्व का भी।
(UPSC 1999, 20 Marks, )