"जिस सौंदर्य की भावना में मग्न होकर मनुष्य अपनी पृथक सत्ता का विसर्जन करता है वह अवश्य एक दिव्य विभूति है। भक्त लोग अपनी उपासना या ध्यान में इसी विभूति का अवलंबन करते हैं।" (UPSC 2012, 12 Marks, )

Enroll Now