दुर्गम बर्फानी घाटी में शत-सहस्र फुट की ऊँचाई पर अलख नाभि से उठने वाले निज के ही उन्मादक परिमल के पीछे धावित हो-होकर तरल-तरुण कस्तूरी-मृग को अपने पर चिढ़ते देखा है, बादल को घिरते देखा है।। (UPSC 2009, 20 Marks, )

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