“प्रेम नाम की मनोवृत्ति का जैसा विस्तृत और पूर्ण परिज्ञान सूर को था, वैसा और किसी कवि को नहीं” – 'भ्रमरगीतसार' के आधार पर विचार कीजिए। (UPSC 1987, 55 Marks, )

Enroll Now