“सूरदास में जितनी सहृदयता और भावुकता है, उतनी ही चतुरता और वाग्विदग्धता भी है” — 'भ्रमरगीतसार' के आलोक में विवेचना कीजिए। (UPSC 1988, 55 Marks, )

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