'भ्रमरगीत' की गोपियों द्वारा सूर ने निर्गुण भक्ति की अपेक्षा सगुण रागानुराग भक्ति की महत्ता प्रतिपादित की है — व्याख्या कीजिए। (UPSC 1990, 55 Marks, )

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