'भ्रमरगीत' व्रजांगनाओं की वचनवक्रता, तन्मयता, संवाद-शैली आदि की दृष्टि से हिन्दी-साहित्य में विशेष स्थान रखता है — तर्क और प्रमाण सहित विवेचना कीजिए। (UPSC 1997, 55 Marks, )

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