“कबीरदास का मूलरूप उनका भक्त रूप है, कविरूप घलुआ मात्र है।” -डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी के इस कथन के संबंध में सोपपत्ति अपना मन्तव्य पुष्ट कीजिए। (UPSC 1997, 55 Marks, )

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