दक्ख़िनी हिन्दी की विशेषताएँ। (UPSC 2013, 10 Marks, )

Theme: दक्ख़िनी हिन्दी की विशेषताएँ Where in Syllabus: (The subject of the above question is "Linguistics.")
दक्ख़िनी हिन्दी की विशेषताएँ।

Introduction

दक्ख़िनी हिन्दी, जिसे दक्खिनी उर्दू भी कहा जाता है, दक्षिण भारत में विकसित एक भाषा है। यह 14वीं शताब्दी में बहमनी सल्तनत के दौरान उभरी। गुलबर्गा और बीदर इसके प्रमुख केंद्र थे। अमीर खुसरो और विलियम गियर्सन ने इसके विकास में योगदान दिया। यह भाषा फारसी, अरबी, और स्थानीय बोलियों का मिश्रण है। दक्ख़िनी साहित्य में क़ुली क़ुतुब शाह और वली दक्खनी जैसे कवियों का महत्वपूर्ण योगदान है।

दक्ख़िनी हिन्दी की विशेषताएँ

 ● इतिहासिक विकास:  
    ● दक्खिनी हिंदी का विकास सल्तनत काल में हुआ, जब अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद तुगलक के समय में दक्षिण भारत में अभियानों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों का स्थानांतरण हुआ।  
    ● देवगिरी या दौलताबाद को राजधानी बनाने के समय यह भाषा विकसित हुई।  
  ● भाषाई विशेषताएँ:  
    ● स्वर और व्यंजन: इसमें खड़ी बोली के सभी स्वर और व्यंजन मिलते हैं, जैसे 'ग', 'फ' आदि।  
    ● उच्चारण में परिवर्तन: 'ड़' की जगह 'ड' का प्रयोग होता है, जैसे 'पड़ा' की जगह 'पडा'।  
    ● अल्पीकरण: शब्दों का संक्षिप्त रूप, जैसे 'मुरख' की जगह 'मूख'।  
    ● शब्दों का उलटा प्रयोग: जैसे 'लखनऊ' को 'नखलऊ'।  
  ● प्रत्यय और संख्यावाचक प्रयोग:  
    ● 'औ' प्रत्यय का प्रयोग, जैसे 'बात' से 'बातां', 'चिराग' से 'चिरागां'।  
    ● संख्यावाचक परिवर्तन: 'उन्नीस' की जगह 'वन्नीस', 'छह' की जगह 'छे'।  
  ● भूतकाल का प्रयोग:  
    ● यकर प्रत्यक्ष का प्रयोग, जैसे 'शंकर' की जगह 'शेयकर'।  
  ● शब्दावली:  
    ● खड़ी बोली शब्दावली का सर्वाधिक प्रचलन।  
 इन विशेषताओं के माध्यम से दक्खिनी हिंदी ने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है, जो इसे अन्य हिंदी बोलियों से अलग करती है।

Conclusion

दक्ख़िनी हिन्दी की विशेषताएँ इसे उत्तर भारतीय हिन्दी से अलग बनाती हैं। दक्ख़िनी में फ़ारसी, अरबी और स्थानीय भाषाओं का प्रभाव स्पष्ट है। यह भाषा दक्षिण भारत में विकसित हुई और इसमें उर्दू का भी समावेश है। ग़ुलाम अली अल्लाना के अनुसार, "दक्ख़िनी हिन्दी ने सांस्कृतिक समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।" भविष्य में, इस भाषा के संरक्षण और अध्ययन से सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिलेगा। भाषाविदों के लिए यह एक समृद्ध अध्ययन क्षेत्र है।