दक्खिनी हिन्दी का परिचय दीजिए। (UPSC 2017, 15 Marks, )

Theme: दक्खिनी हिन्दी: एक संक्षिप्त परिचय Where in Syllabus: (The subject of the above question is "Linguistics.")
दक्खिनी हिन्दी का परिचय दीजिए।

Introduction

दक्खिनी हिन्दी, जिसे दक्खिनी उर्दू भी कहा जाता है, दक्षिण भारत में विकसित एक भाषा है। यह 14वीं शताब्दी में बहमनी सल्तनत के दौरान उभरी। अमीर खुसरो और वली दक्खिनी जैसे कवियों ने इसे समृद्ध किया। यह भाषा हिन्दी और उर्दू के मिश्रण के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं के प्रभाव को भी दर्शाती है। दक्खिनी का साहित्यिक योगदान महत्वपूर्ण है, विशेषकर सूफी साहित्य में।

दक्खिनी हिन्दी: एक संक्षिप्त परिचय

 ● दक्खिनी हिन्दी का उद्भव:  
    ● 13वीं शताब्दी के अंत में अलाउद्दीन के दक्षिण अभियान के दौरान कई अधिकारी, कर्मचारी और व्यापारी दक्षिण गए।  
    ● 14वीं शताब्दी में मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी को दौलताबाद (देवगिरि) स्थानांतरित किया, जिससे दिल्ली और निकटवर्ती क्षेत्रों के लोग वहां बस गए।  
    ● 15वीं शताब्दी में मुगल फौज और अधिकारी खड़ी बोली क्षेत्र से दक्षिण में नियुक्त किए गए।  
  ● भाषाई प्रभाव और विकास:  
        ○ खड़ी बोली क्षेत्र से गए लोगों ने अरबी, फारसी, और मिश्रित खड़ी बोली को अपनाया, जो दक्खिनी हिन्दी के रूप में विकसित हुई।
    ● कन्नड़, तेलगू, और मराठी भाषाओं का प्रभाव इस पर पड़ा, जिससे यह एक विकसित भाषा बन गई।  
  ● भौगोलिक विस्तार:  
        ○ दक्खिनी हिन्दी का प्रयोग अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुंडा, बरार, और मुम्बई तक फैला हुआ है।
        ○ सीमित रूप से इसका प्रयोग तमिलनाडु और केरल में भी होता रहा है, हालांकि इसका मुख्य स्थान आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, और केरल है।
  ● दक्खिनी साहित्य:  
        ○ प्रमुख साहित्यकारों में ख्वाजागेसूद राजा का नाम आता है, जिनकी रचना 'मिराजुल आशिकीन' दक्खिनी गद्य की पहली रचना है।
        ○ अन्य साहित्यकारों में मुल्ला वजदी, बली दक्किनी, और गुलाम अली प्रमुख हैं।
  ● कविता का उदाहरण:  
    ● बंदा नवाज की कविता:  
             "मैं आशिक उस पीव का जिसने मुझे जीव दिया है।"
 दक्खिनी हिन्दी का यह संक्षिप्त परिचय इसके ऐतिहासिक विकास, भाषाई प्रभाव, भौगोलिक विस्तार और साहित्यिक योगदान को दर्शाता है।

Conclusion

दक्खिनी हिन्दी का उद्भव दक्षिण भारत में हुआ और यह हिन्दी की एक महत्वपूर्ण उपभाषा है। इसका विकास 13वीं शताब्दी में हुआ और यह उर्दू से प्रभावित रही। अमीर खुसरो और विलियम जोंस जैसे विद्वानों ने इसके साहित्यिक योगदान को सराहा। आज, यह भाषा सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित है। भविष्य में, इसे प्रोत्साहित करने के लिए शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है ताकि इसकी समृद्ध विरासत जीवित रहे।