भारत सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन में हाल ही में शुरू किए गए उपायों पर चर्चा करें जो पहले की प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण से अलग हैं।
(UPSC 2020,15 Marks,)
Discuss the recent measures initiated in disaster management by the Government of India departing from the earlier reactive approach.
प्रस्तावना
भारत में आपदा प्रबंधन (Disaster Management) पारंपरिक रूप से एक प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण का पालन करता रहा है, जो आपदा के बाद राहत और पुनर्वास पर केंद्रित होता है। हालांकि, हाल के वर्षों में, सरकार ने आपदा प्रबंधन की ओर एक अधिक सक्रिय और समग्र दृष्टिकोण की ओर बढ़ने के लिए कई उपाय किए हैं।
गिल्बर्ट एफ. व्हाइट के अनुसार, आपदा प्रबंधन (Disaster Management) में भूमि-उपयोग योजना (land-use planning), संसाधन आवंटन (resource allocation), और सामुदायिक भागीदारी (community engagement) के माध्यम से आपदाओं के जोखिम को समझना और कम करना शामिल है।
Explanation
Recent Measures in Disaster Management vs Earlier Reactive Approach in India
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Aspect |
Recent Measures in Disaster Management |
Earlier Reactive Approach |
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Focus |
प्रोएक्टिव (Proactive) और प्रिवेंटिव (Preventive) उपाय |
रिएक्टिव (Reactive) और रिस्पॉन्स-सेंट्रिक (Response-Centric) दृष्टिकोण |
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Policy Framework |
व्यापक और एकीकृत नीतियाँ |
विखंडित और तदर्थ नीतियाँ |
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Community Engagement |
समुदाय की भागीदारी पर जोर |
सीमित समुदाय की भागीदारी |
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Technology Integration |
उन्नत प्रौद्योगिकियों का समावेश |
पारंपरिक विधियों पर निर्भरता |
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Early Warning Systems |
मजबूत और समय पर चेतावनी प्रणाली |
सीमित और असंगत चेतावनियाँ |
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Capacity Building |
प्रशिक्षण और क्षमता में निवेश |
सीमित प्रशिक्षण और कौशल विकास |
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Risk Assessment and Planning |
मजबूत जोखिम आकलन और योजना |
सीमित पूर्व-योजना और जोखिम विश्लेषण |
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Infrastructure Resilience |
मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान |
प्रतिक्रियात्मक मरम्मत और पुनर्निर्माण |
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International Collaboration |
सक्रिय सहयोग और जानकारी साझा करना |
सीमित अंतरराष्ट्रीय सहयोग |
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Post-Disaster Recovery |
व्यापक पुनर्प्राप्ति रणनीतियाँ |
तदर्थ पुनर्प्राप्ति उपाय |
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Policy Implementation |
प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर |
कार्यान्वयन में अंतराल और देरी |