राजभाषा हिन्दी के विकास और उन्नति में आने वाली बाधाओं का वर्णन कीजिए। (UPSC 2014, 20 Marks, )

Theme: हिन्दी के विकास में बाधाएँ Where in Syllabus: (Modern Indian Languages)
राजभाषा हिन्दी के विकास और उन्नति में आने वाली बाधाओं का वर्णन कीजिए।

Introduction

राजभाषा हिन्दी के विकास में कई बाधाएँ हैं, जिनमें क्षेत्रीय भाषाओं की प्रतिस्पर्धा और अंग्रेजी का वर्चस्व प्रमुख हैं। महात्मा गांधी ने हिन्दी को जनमानस की भाषा कहा, परंतु रामधारी सिंह दिनकर ने इसके विकास में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को बाधा माना। 2011 की जनगणना के अनुसार, 43.63% भारतीय हिन्दी बोलते हैं, फिर भी इसके उन्नति में संसाधनों की कमी और भाषाई विविधता चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं।

हिन्दी के विकास में बाधाएँ

 ● प्रशासनिक उपेक्षा: हिन्दी को 'राजभाषा' के रूप में स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा प्रशासनिक उपेक्षा है। संघीय प्रशासनिक सेवा में ज्यादातर उच्च मध्यम वर्ग के व्यक्ति कार्यरत हैं जिनके संस्कार अंग्रेजी के हैं। ये अधिकारी अपने अंग्रेजी ज्ञान पर गर्व महसूस करते हैं और हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं की उपेक्षा करते हैं।  
  ● संविधानिक अनुच्छेद 343: अनुच्छेद 343 में स्पष्ट उल्लेखित है कि संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने हिन्दी कौशल विकास के लिए 15 वर्ष तक के लिए छूट दी गई थी, किन्तु उन्होंने हिन्दी कौशल विकास की उपेक्षा की।  
  ● राजनीतिकरण: गैर-हिन्दी भाषा राज्यों के राजनीतिक दलों द्वारा हिन्दी के राजनीतिकरण से भी बाधा उत्पन्न होती है। विशेष रूप से तमिलनाडु और आन्ध्रप्रदेश के दल हिन्दी को राजभाषा के रूप में विकसित करने का विरोध करते हैं, जिससे यह मुद्दा भावनात्मक बन जाता है और निष्पक्ष तर्क की संभावना कम हो जाती है।  
  ● संघीय सरकार की उपेक्षा: संविधान के अनुच्छेद 344 में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति द्वारा हर 5 वर्ष पश्चात् एक आयोग का गठन किया जाएगा जो हिन्दी की प्रगति का जायजा लेगा। किन्तु अभी तक केवल एक ही आयोग (1955) का गठन किया गया है और उसकी सकारात्मक सिफारिशों की उपेक्षा की गई है।  
  ● हीन भावना: भारतीय जनता में अपनी राजभाषा के प्रति हीन भावना का पाया जाना भी एक बड़ी बाधा है। अंग्रेजी बोलना संस्कारवान और ज्ञानी होने का पर्याय बन गया है, जबकि हिन्दी को ग्रामीण और असंस्कारवान की भाषा माना जाता है। इसके साथ, हिन्दी में जीविकावृत्ति के कम अवसर भी इसे नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।  

Conclusion

राजभाषा हिन्दी के विकास में प्रमुख बाधाएँ हैं क्षेत्रीय भाषाओं की विविधता, अंग्रेजी का वर्चस्व, और तकनीकी संसाधनों की कमी। महात्मा गांधी ने कहा था, "हिन्दी जनमानस की भाषा है।" हिन्दी को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षा प्रणाली में सुधार, तकनीकी अनुवाद उपकरणों का विकास, और क्षेत्रीय भाषाओं के साथ समन्वय आवश्यक है। सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। यूनिसेफ के अनुसार, भाषा विकास में निवेश से सामाजिक समृद्धि बढ़ती है।